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114 पाकिस्‍तानियों ने भारतीय बनने का लिया फैसला, भारत में हो रहे विकास से हैं प्रभावित

Delhi /2, | Publish Date: Jul 21 2017 5:34PM IST Views:473

अपना मुल्‍क छोड़ना किसी के लिए भी आसान काम नहीं होता है। जिस मिट्टी में बचपन से खेले, जिस मोहल्ले की गलियों में दौड़े उसे छोड़कर किसी और देश में जाकर रहने का ख्वाब ही दिल में डर पैदा कर देता है। अगर कोई भी ऐसा फैसला लेता है तो उसके पीछे जरूर कोई खास वजह होती है। ऐसी ही वजहों को लेकर 114 पाकिस्‍तानियों ने भारतीय बनने का फैसला लिया हैं, इन लोगों में नंदलाल मेघानी, डॉ. विशनदास मनकानी और किशनलाला अडानी भी शामिल हैं। भारत की नागरिकता मिलने पर सभी लोगों ने खुशी जताई है। 

भारत में हो रहे विकास से हैं प्रभावित -
वहीं पाकिस्तान से आने वाले शरणार्थियों को नागरिकता देने के मामले में जिलाधिकारियों को अधिकार दिए जाने की तारीफ करते हुए विशनदास मनकानी ने बताया है कि, "2001 में वह अपने चार बच्चों के साथ भारत आए थे और 2016 में जाकर मुझे व मेरी पत्‍नी को भारतीय नागरिकता मिल पाई। हम भारत में हुए विकास से प्रभावित हैं, जो पाकिस्तान में नहीं दिखता। इसके अलावा भारत के सुरक्षित माहौल ने भी हमें यहां आकर रहने पर मजबूर किया है।"

घर से निकलने समय नहीं होती वापस आने की उम्मीद -
पाकिस्‍तान से आए 59 वर्षीय किशनलाल अडानी ने बताया कि वह 2005 में अपनी पत्‍नी और बेटों के साथ भारत आए थे। अडानी पाकिस्तान के सिंध प्रांत के थारपकड़ कस्बे में जनरल स्टोर चलाते थे। अब भारत में अपने बेटों के साथ उन्होंने बर्तन की दुकान शुरू की है। हालांकि वह अब भी अपने मुल्‍क को याद करते हैं। उन्‍होंने भावुक होते हुए कहा कि, "मैं अब भी अपने उस घर और दोस्तों को याद करता हूं, जिन्हें छोड़कर हम यहां चले आए हैं। हालांकि आतंकवाद के चलते हमारे लिए वहां बचे रहना मुश्किल हो गया था। वहां के हालातों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि, "जब हम घर से बाहर निकलते थे तो सोचते थे कि पता नहीं वापस आ भी पाएंगे या नहीं।"

जिंदगी की नई शुरुआत करने के आए थे भारत -
घाटलोडिया में रहने वाले 50 वर्षीय नंदलाल मेघानी ने बताया कि वह 16 साल पहले पाकिस्तान के सिंध प्रांत से अपनी पत्नी और बेटी को लेकर जिंदगी की नई शुरुआत करने के लिए भारत आए थे। उन्‍होंने अपना कारोबार और घर सब कुछ बेच दिया था। वह भारत के लोगों की आम जिंदगी से बहुत प्रभावित थे और इसलिए यहां आकर नागरिकता पाने के लिए आवेदन कर दिया। भारत में शरण लेने की उनकी प्रमुख वजह, पाकिस्तान में अपराध की दर उच्‍च है। उन्‍होंने पाकिस्‍तान में बढ़ते आतंकवाद के मद्देनजर अपने मुस्‍लिम दोस्‍तों को भी यहां आने के लिए प्रेरित किया।


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