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41 साल बाद भारत आकर माँ से मिली स्वीडिश नागरिक नीलाक्षी, माँ को देखकर नहीं रुके आंसू

Delhi /1, | Publish Date: Jun 14 2017 3:26PM IST Views:589

माँ-बाप का बच्चो से दूर रहना एक पल के लिए भी कितना कष्टदायी होता है यह तो सभी जानते है लेकिन अगर एक माँ अपनी बेटी से 41 सालों तक दूर रहे तो मिलने की तड़प का अंदाजा लगाया जा सकता है। भारत में जन्मी स्वीडिश नागरिक नीलाक्षी एलिजाबेथ जोरेंडल 41 साल बाद अपनी माँ से मिली। यह पल बेहद भावुक पल रहा। दरअसल महाराष्ट्र की रहने वाली एक महिला ने गरीबी के चलते अपनी बेटी नीलाक्षी को स्वीडन की एक दंपत्ति को गोद दे दिया था। उस समय नीलाक्षी मात्र तीन वर्ष की थी। लेकिन अपने जैविक माता-पिता की तलाश में  44 वर्षीय नीलाक्षी भारत आ गई। अगेंस्ट चाइल्ड ट्रैफिक नामक एनजीओ की मदद से नीलाक्षी अपनी माँ से मिल पायी। यवतमाल के अस्पताल में भर्ती अपनी माँ को देख नीलाक्षी की आँखों से आसूं रुक नहीं रहे थे, वैसा ही हाल उसकी माँ का था। ये ख़ुशी के आंसू थे जो थमने का नाम नहीं ले रहे थे। यहां पर नीलाक्षी को पता चला कि उसकी माँ गंभीर रोगों से पीड़ित है। 
नीलाक्षी के जैविक पिता खेतो में मजदूरी का काम करते थे और नीलाक्षी के जैम के समय ही उन्होंने आत्महत्या कर ली थी। नीलाक्षी का जन्म पंडित रामाबाई मुक्ति मिशन के आश्रय एवं दत्तक गृह में हुआ था। पिता की म्रत्यु के बाद माँ ने उसे छोड़कर दूसरी शादी कर ली। पंडित रामाबाई मुक्ति मिशन की पनाहगार से 1976 में नीलाक्षी को एक स्वीडिश कपल ने गोद ले लिया था। अगेंस्ट चाइल्ड ट्रैफिक एनजीओ की अंजलि पवार ने बताया कि नीलाक्षी 1990 से अपनी माँ की तलाश में 6 बार भारत आ चुकी है। नीलाक्षी ने अपनी माँ के इलाज में होने वाले पूरे खर्च को वहन करने का आश्वासन दिया है। 

 


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