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सांस्कृतिक पर्वों से जुदा और आधुनिकता की देन है फादर्स डे, जाने ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

Lucknow /1, | Publish Date: Jun 17 2017 12:04PM IST Views:640

मृत्युंजय दीक्षित 
वर्तमान आधुनिक समय में जब पूरे विश्व में आर्थिक उदारीकरण और ग्लोबलाइजेशन का दौर चल रहा है, उस समय कुछ नयी संस्कृति के पर्वों और ख़ास दिनों का उदय भी हो रहा है। प्रचार- प्रसार के कारण मीडिया के इस युग में आधी से अधिक वैश्विक संस्कृति प्रभावित हो रही है। प्रतिदिन विदेशी सभ्यता की देखा-देखी और विदेशी कंपनियों के उत्पादों को बेचने के लिए नए-नए तरीके ऐजाद हो रहे है जिनमे से एक है, फादर्स डे।

यदि फादर्स डे की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर ध्यान दिया जाये तो पता चलता है कि इस दिन को मनाने को लेकर विदेशों में ही एकमतता नहीं थी और अभी भी नहीं है। लेकिन भारत में फादर्स डे को मनाने के लिए विदेशी कंपनियां खासकर सोशल मीडिया, टी.वी. और मोबाइल कंपनियां विशेष तैयारी करती हैं। समाचार पत्रों मेें विशेष कालम तैयार किये जाते है। अधकचरे ज्ञान से विभूषित और अपने आप में आधुनिकता का चादर ओढ़ने वाले आज के समाज को यही नहीं पता है कि भारतीय संस्कृति व सभ्यता में पिता को कितना महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। भारतीय समाज में पिता को आकाश के समक्ष तथा माता को धरती के समकक्ष माना गया है।

भारतीय समाज में माता अपने बच्चे का पालन पोषण करते है तथा वह अपनी संतान के हर सुख व दुख में भागीदार बनते है जबकि कहा जाता है कि पिता परिवार का आर्थिक रूप से पालन करने के लिए परिवार से दूर चला जाता है। संतान अधिकांशतः माता के सानिध्य में रहती है। जबकि वास्तव मेें ऐसा नहीं है। भारतीय संस्कृति में पिता का उतना ही महत्व है जितना की माता का। एक प्रकार से पिता अपनी संतानों का मार्गदर्शक होता है। वह अपने हर बालक व बालिका को घर से दूर रहकर भी हर प्रकार से मजबूत बनाता है। पिता एक मजबूत संबल होता है। भारतीय संस्कृति में मान्यता है कि यदि पिता का आशीर्वाद बालक व बालिका को मिल जाता है तो समझों उसका जीवन पूरी तरह से धन्य हो जाता है। पिता सदा अपनी संतान का भला ही चाहता है। पिता के जीवन से ही संताने अपना आगे का मार्ग चुनती हैं। पिता सर्वोपरि है। हिंदू धर्म में भगवान सूर्य को  पिता माना गया है। शनि देव को सूर्य पुत्र माना गया है। महाभारत की लड़ाई में कर्ण सूर्य पुत्र था।  पितृभक्त ध्रुव अपने पिता के आशीर्वाद से आकाश की ऊंचाइयों को छू गया।


आधुनिक फाइर्स डे की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

फादर्स डे की शुरूआत 20 वीं सदी से मानी जाती है। मान्यता है कि पिताधर्म तथा पुरूषों द्वारा परवरिश का सम्मान करने के लिए मातृ दिवस के पूरक उत्सव के रूप में इस दिन को ख़ास मनाया जाता है। यह हमारे पूर्वजों और उनके सम्मान की स्मृति में भी मनाया जाता है। फादर्स डे विश्व के सभी देशों में अलग- अलग तारीखों तथा अलग- अलग रूपों से मनाया जाता है।  जिसमें उपहार देना, पिता के लिए विशेष भोज का आयोजन एवं पारिवारिक गतिविधियां शामिल हैं के रूप में मनाया जाता है । विदेशी संस्कृति आमतौर पर  बिलकुल अलग किस्म की है। वहां पर वृद्ध माता- पिता को परिवार से अलग कर दिया जाता है उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं होता। वहां पर बच्चों के पास इतना समय नहीं होता कि वे अपने पिता व माता के लिये प्यार व सांत्वना के दो क्षण निकाल सकें। इसी दृष्टिकोण से एक दिन पिता को समर्पित किया गया है। यह विदेशी कल्चर है। जबकि इसके विपरीत अपने यहां पितरों को याद करने के लिए पितृपक्ष मनाया जाता है। पितरों का तर्पण किया जाता है। हम लोग प्रतिदिन पिता का आशीर्वाद लेते हैे। उनका वास्तविक प्रेम प्राप्त करके जीवन में आगे बढ़ते हैं। पिता जिंदगी को जीने का ढंग सिखाते हैं। वह अपने बालक और बालिका को इतना मजबूत देखना चाहते हैं कि वह स्वयं अपने पैरों पर खड़ा होकर दूसरों के लिए समस्या न बनकर समाज की समस्या हल करने वाला बनकर समाज में उभरे। पिता कभी भी अपने बालक व बालिका को निराशा की मुद्रा में नहीं देखना चाहता  अपितु वह उसे मानसिक रूप से  इतना  मजबूत बनाना चाहता है कि वह किसी भी कठिन से कठिन परिस्थितियों में प्रसन्न रहते हुए जीवन का आनंद उठा सके।
   
कहा जाता है कि 6 दिसम्बर 1907 को पश्चिम वर्जीनिया के एक खान में मारे गये 210 पिताओं के सम्मान में इस विशेष दिवस का आयोजन किया गया। इस डे के विवादों में रहने के कारण पश्चिमी देशों में आधिकारिक छुटटी बनाने में कई दिन लग गये। विदेशों में जहां मदर्स डे को  उत्साह के साथ मनाया जाता था वहीं फादर्स डे का मजाक बनता था। समाचार पत्र- पत्रिकाओं में कार्टून और व्यंग आदि प्रकाषित होते थे। धीरे- धीरे अवकाश को प्रोत्साहन मिला लेकिन गलत कारणों के लिए। अमेरिका में कांग्रेस के भारी विरोध के बाद 1966 मेें राष्ट्रपति लिंडन जानसन ने प्रथम घोषणा जारी करते हुए जून महीने के तीसरे रविवार को पिता के सम्मान में फादर्स डे की घोषणा की और 1972 में राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने फादर्स डे पर अवकाश घोषित कर दिया।


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