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एक नज़र भारत के 13वें राष्ट्रपति 'प्रणव मुखर्जी' पर, कार्यकाल के दौरान लिए कई बड़े फैसले

Delhi /1, | Publish Date: Jul 25 2017 1:25PM IST Views:408

भारत के 13वें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का राष्ट्रपति के रूप में आज कार्यकाल समाप्त हो गया। उनके स्थान पर रामनाथ कोविंद ने देश के 14वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण किया। प्रणब दा ने अपने कार्यकाल के खत्म होने से एक दिन पहले (कल) एक भावुक ट्वीट किया और देश की जनता का शुक्रिया भी अदा किया। आइये डाले एक नज़र प्रणव मुखर्जी के कुछ बड़े फैसलों पर..

जीएसटी को किया लॉन्च -
1 जुलाई, 2017 को संसद के केंद्रीय सभागार में प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक साथ बटन दबाकर वस्तु एवं सेवा कर (जीसएसटी) को लागू किया। प्रणब मुखर्जी पिछले तीन सालों में पीएम मोदी के साथ अपने सौहार्दपूर्ण संबंधों के कारण लगातार चर्चा में बने रहे। राष्ट्रपति पद पर रहते हुए अपने आखिरी भाषण में प्रणब मुखर्जी ने मोदी के साथ अपने संबंधों का भी जिक्र किया जिसमे उन्होंने कहा कि, "उनके प्रति विनम्र व्यवहार के लिए वो हमेशा मोदी को याद रखेंगे।" जीएसटी लांच के अगले दिन ही पीएम मोदी ने भी प्रणब की जमकर तारीफ की। मोदी ने कहा, ''प्रणब दा मेरा ख्याल एक पिता की तरह रखते हैं, जिसके कारण वो हमेशा मेरी सेहत की चिंता करते रहते हैं।

कभी भी आतंकियों पर नहीं किया रहम -
प्रणब दया याचिका खारिज करने के मामले में सबसे सख्त नजर आते हैं। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपने अब तक के कार्यकाल में 34 दया याचिकाओं पर फैसला किया, जिसमें से उन्होंने 30 याचिकाएं ठुकरा दी और बाकी 4 याचिका पर फैसला बदल दिया। अपने कार्यकाल प्रणब दा ने मुंबई के 26/11 हमले के दोषी अजमल कसाब और संसद भवन पर हमले के दोषी अफजल गुरु और 1993 में हुए मुंबई बम धमाके के दोषी याकूब मेनन की फांसी की सजा को मंजूरी देने में बिल्कुल भी देर नहीं लगाई। जिसके कारण कसाब को 2012 में, अफजल गुरु को 2013 में और याकूब मेनन को 2015 में फांसी पर लटका दिया गया।   

संविधान की गरिमा बरकरार रखने पर जोर -
2016 में मोदी सरकार ने अरुणाचल प्रदेश में अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल कर राष्ट्रपति शासन लगाने का फैसला किया। अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल राजखोवा ने कांग्रेस के दस बागी विधायकों की बर्खास्तगी पर फैसले के लिए विधानसभा का सत्र पहले बुला दिया और उसी पर विवाद हुआ। मामला हाई कोर्ट पहुंचा और फिर उसके फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल के फैसले को गलत माना। इसके बाद एक सम्मेलन में राष्ट्रपति मुखर्जी ने कहा था कि, "आजादी के बाद हमारा देश लगातार मजबूत होता आया है। ऐसा हमारे संविधान में शामिल नियमों को मजबूती से अमल में लाने की वजह से हो पाया है। संविधान हमेशा रहने वाला अहम दस्तावेज है और यह हमारी आकांक्षाओं और उन्हें समावेशी तरीके से हासिल करने को लेकर हमारी विशाल योजनाओं को प्रदर्शित करता है। संवैधानिक पदों पर बैठे हम सभी लोगों का कर्तव्य है कि हम इस पवित्र ग्रंथ की पवित्रता को बरकरार रखें।"

कैबिनेट के पास नहीं लौटाया अध्यादेश -
प्रणब के कार्यकाल में एक भी ऐसा मौका नहीं आया जब उन्होंने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करते हुए कैबिनेट से पास किसी अध्यादेश को लौटाया हो, लेकिन सरकार को सलाह जरूर दी। वित्त मंत्री अरुण जेटली खुद कई बार नीतिगत मसलों पर चर्चा के लिए राष्ट्रपति भवन जाते थे।


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