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चीन की जिद से लेकर भारत की रणनीति तक, जानें सबकुछ..

Delhi /2, | Publish Date: Jul 19 2017 1:13PM IST Views:549

भारत और चीन सीमा विवाद को लेकर परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही है। चीन का अडि़यल रुख अभी भी बरकरार है। सीमा पर हरकतें करने के साथ ही साथ चीनी मीडिया भी भारत पर दबाव बनाने की कोशिश में लगा हुआ है और भारत के खिलाफ प्रोपेगेंडा का इस्तेमाल कर रहा है, जिसके तहत चीनी मीडिया के हवाले से पाकिस्तानी न्यूज चैनलों पर भारत-चीन के बीच युद्ध होने की खबरें लगातार चलाई जा रही हैं। ऐसे में हर भारतीय के मन में एक सवाल जरूर उठ रहा होगा कि, "भारत सरकार इस मुद्दे को सुलझाने के लिए क्या कर रही है?" 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जम्मू-कश्मीर से लेकर अरूणाचल प्रदेश तक भारत और चीन की सीमा की लंबाई 3,488 किलोमीटर है, जिसमें 220 किलोमीटर लंबा क्षेत्र सिक्किम में आता है। वर्ष 1998 में चीन-भूटान और 2005 में भारत-चीन के बीच सीमा को लेकर एक जैसा समझौता हुआ था इसमें यही बात की गई थी कि, "दोनों देश की सीमाओं पर सैनिक अपनी जगहों पर ही रहेंगे।" 1958 में मौजूदा मुख्यमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने संसद में कहा था कि, "भूटान के खिलाफ कोई भी एक्शन भारत के खिलाफ एक्शन माना जाएगा।"

प्रयास लगातार है जारी -
आपको बता दें कि फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज दुनिया की दूसरे ताकतवर देशों को अपने साथ खड़े करने में लगे हैं, ताकि कूटनीतिक तरीके से चीन पर दबाव बनाया जा सके। इसके साथ भारत सरकार चीन को मुहतोड़ जवाब देने के लिए सीमा से सटे इलाकों में कई तरह की तैयारियां कर रही हैं। 

क्या है चीन की रणनीति?
चीन की हमेशा से कोशिश रही है कि वह बॉर्डर पर इतनी तैयारी कर ले ताकि युद्ध जैसी स्थिति में उसके जवान भारत की सीमा तक आसानी से पहुंच सकें, जिसके चलते वह लगातार सीमावर्ती इलाकों में सड़क निर्माण का कार्य करता रहा है। लेकिन चुंबी घाटी में सड़क निर्माण को लेकर भारतीय सैनिकों ने चीन को रोक दिया जिससे आजकल वो बौखलाया हुआ है। बता दें कि चीन जिस जगह सड़क बनाना चाहता है, वह मैकमोहन लाइन के हिसाब से भारत के क्षेत्र में आता है लेकिन चीन 1914 में हुए इस समझौते को नहीं मानता है और उस जगह को अपने देश का हिस्सा बताता है।  

विदेश सचिव का क्या है कहना? 
विदेश सचिव एस जयशंकर ने इस बारे में संसदीय समिति को बताया कि डोकलाम विवाद को लेकर चीन का रुख आक्रामक है और अपनी सीमा को गलत तरीके से दिखा रहा है। अभी भी स्थितियां इतनी जटिल नहीं हुई है, लेकिन उसे पेश ऐसे ही किया जा रही है। हम लोग भारत सीमा पर दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने के लिए राजनयिक तरीके से चीन के साथ बातचीत का प्रयास कर रहे हैं। 

भारत की क्या है रणनीति?
अपने ये तो सुना ही होगा कि, "जैसे को तैसा" और भारत भी चीन को लेकर कुछ ऐसा ही सोच रहा है। चीन को जवाब देने के लिए सरकार ने अब चीन सीमा के आसपास 73 नई सड़कें बनवाने का फैसला लिया है, ताकि युद्ध की दशा में इन सड़कों के माध्‍यम से आसानी से आवागमन हो सके। आपको बता दें कि इससे पहले भारत की रणनीति इससे उलट हुआ करती थी, मतलब भारत का मानना था की अगर बॉर्डर इलाके वीरान होंगे तो युद्ध जैसे हालात बनने पर चीनी सेना को भारतीय सीमा में घुसने में मुश्किलें होंगी।  

किरण रिजिजू ने क्या कहा?
गृह राज्‍यमंत्री किरण रिजिजू ने कल लोकसभा में बताया कि, "चीन के बॉर्डर इलाकों में रक्षा मंत्रालय के खर्च से 46 सड़कों का निर्माण कराया जाएगा जबकि 27 सड़कों का निर्माण गृह मंत्रालय करवाएगा, जिसमें से लगभग 30 सड़कों का निर्माण कार्य पूरा भी हो चुका है।" जानकारी के मुताबिक इन सड़कों का निर्माण साल 2012-13 तक हो जाना था। निर्माण में हुई देरी की वजह बताते हुए किरण रिजिजू ने कहा कि, "सीमावर्ती इलाके काफी ऊंचाई पर हैं जोकि काफी बीहड़ भी हैं और प्राकृतिक आपदाओं के चलते ये काम अत्यधिक कठिन है। लेकिन अब सैन्‍य अधिकारियों के साथ मुलाकात करके इस मुद्दे को सुलझा लिया गया है।"


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