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बुद्धिजीवियों ने कहा, भारतीय संस्कृति के हर आयाम में समाया है योग

Lucknow /3, | Publish Date: Jun 18 2017 6:25PM IST Views:481

सबने एक स्वर से कहा कि भारत की संस्कृति का हर अंग योग से इस तरह जुड़ा है कि इसके बिना न तो संगीत की कल्पना की जा सकती है और न ही काव्य रचना की। यहां तक की रंगमंच,मूर्तिशिल्प और चित्रकारी जैसे कार्यों में जिस एकाग्रता की सबसे पहले आवश्यकता होती है,वह योग के माध्यम से ही किसी कलाकार में उतरती है।

भरतनाट्यम एवं कथक नृत्यों को अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर अपनी सफल प्रस्तुति देकर भारत का सम्मान बढ़ा चुकी कुशल नृत्यांगना मंजरी पाण्डेय ने योग और नृत्यकला के पारस्परिक संबंध के विषय में बताया कि भरतनाट्यम की अधिकांश मुद्राओं में योग की विभिन्न मुद्राएं प्रदर्शित होती हैं। उन्होंने बताया कि नृत्य के विभिन्न स्तरों पर कुशलता प्राप्त करने के लिए जिस एकाग्रता की जरूरत किसी भी नर्तक को पड़ती है वह योग की कुशल साधना के बिना नहीं आ सकती।

 

आकांक्षा थियेटर आर्ट्स के माध्यम से पिछले तीन दशकों में दर्जनों ऐतिहासिक नाट्य प्रस्तुतियां दे चुके वरिष्ठ रंगकर्मी प्रभात कुमार बोस ने रंगमंच और योग के संबंध पर बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर अभिनय और निर्देशन की शिक्षा देने वाले लगभग सभी अभिनय प्रशिक्षण संस्थानों में योग की कक्षाएं हमेशा से ही चलती रही हैं। संवाद नियंत्रण तथा स्वरभंगिमा पर पकड़ पाने के लिए तो योग अनिवार्य ही है, इसके साथ ही कुशल अंग संचालन और चरित्रों पर पकड़ बनाने के लिए एक रंगमंच कलाकार को जिस अटूट एकाग्रता और ध्यान की आवश्यकता पड़ती है,वह भारतीय योगदर्शन के बिना सहजता से संभव नहीं है,इसीलिए आज भारत में ही नहीं बल्कि बाहर के देशों में भी रंगमंच को योग से जोड़कर देखा जा रहा है। बोस ने बताया कि उनके संस्थान में अभिनय सीखने के आने वाले सभी कलाकारों को विभिन्न योगक्रियाओं के माध्यम से स्वर नियंत्रण करने और अंग संचालन पर नियंत्रण पाने के प्रशिक्षण दिये जाते हैं।

 

हिन्दी साहित्य में अगीत विधा के माध्यम से पहचान बनाने वाले राजधानी के वरिष्ठ कवि रंगनाथ मिश्र सत्य ने भी साहित्य रचना को योग का ही विस्तार बताते हुए कहा कि एक कवि जब भाव समुद्र में डूबकर रचना करता है तो बिना एकाग्रता के वह किसी सार्थक कविता या कहानी को जन्म नहीं दे सकता। मिश्र का कहना है कि हर कालजयी साहित्यिक रचना के पीछे रचनाकार की जिस एकाग्रता का प्रमुख योगदान होता है,वह अपने मन पर नियंत्रण किये बिना संभव नहीं है और भारतीय योग अपने मन और इंद्रियों पर इसी नियंत्रण की शिक्षा देता है।

 

आगामी 21जून को प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित होने वाले विशेष समारोह की तैयारियों में उत्तर प्रदेश का सांस्कृतिक महकमा भी पूरे जोर-शोर से जुटा हुआ है। सांस्कृति कार्य निदेशक हीरालाल ने इस विषय पर जानकारी देते हुए कहा कि समारोह स्थल पर सांस्कृतिक तथा संगीत प्रस्तुतियों के लिए विभागीय सहयोग दिया जा रहा है, जिसमें समारोह को रोचक तथा मनोरंजक बनाने के लिए सांस्कृतिक कार्यविभाग चयनित कलाकारों,गायकों तथा संगीतकारों की सूची बना रहा है,जिसे शासन स्तर पर अनुमोदन के लिए आवश्यकता पड़ने पर भेजा जायेगा।

 


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