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सफेद दाग (ल्यूकोडर्मा) शरीर से ज्यादा नजरिये की बीमारी

Lucknow /8, | Publish Date: Jun 24 2017 5:28PM IST Views:395

लखनऊ । दुनिया में लगभग दो प्रतिशत लोग सफेद दाग से पीड़ित है और समाज ऐसे लोगों को उपेक्षित दृष्टिकोण से देखता है । विवेकानन्द अस्पताल के चर्मरोग विशेषज्ञ डॉ० अजय कुमार राय ने कहा कि भारत में इस चर्मरोग से ग्रसित लोगों की संख्या 4-5 प्रतिशत है जिसकों सामाजिक कलंक के रूप में देखा जाता है । रोग का कारण बतातें हुए उहोने कहा कि सफेद दाग के मामले में त्वचा का रंग बनाने वाली कोशिकाएं मरने लगती है जिससे शरीर में उजले धब्बे बनने लगते है । इस रोग को विटिलगो, ल्यूकोडर्मा, फुलेरी या श्वेतपात के नाम से भी जाना जाता है । 

लक्षणों की चर्चा करते हुए डॉ० अजय ने बताया कि जब चमड़ी का रंग हल्का पड़ने लग जाए और उस हिस्से के बाल सफेद होने लगे तथा वह जगह भी सफेद होने लगे तब मान लेना चाहिए कि सफेद दाग तेजी से फैलने वाला है । कारणों पर विस्तृत जानकारियां देते हुए कहा कि, क्रोनिक इन्फेक्शन, लगातार गला या पेट खराब रहना, अनीमिया, थॉयराइड, डॉयबटीज, बर्थमार्क, केमिकल ल्यूकोडर्मा भी सफेद दाग का कारण हो सकता है । 

भारतीय महिलाओं द्वारा मस्तक पर लगाई जाने वाली बिन्दी को चर्मरोग का बड़ा कारण बतातें हुए डॉ० राय ने बताया कि चिपकने वाली बिन्दी के गोंद में मोनोबेन्जाइल ईस्टर्स अॉफ हाइडोक्यूनोन पदार्थ होने की वजह से चेहरे पर सफेद दाग बन सकता है। इसके अलावा प्लास्टिक, रबर या अन्य केमिकलस् की वजह से भी सफेद दाग हो सकता है। इस चर्मरोग से सम्बम्धित भ्रांतियों को स्पष्ट करते हुए डॉ० अजय ने कहा कि सफेद दाग छूने, चूमने या शारीरिक सम्बंध बनाने से नहीं फैलता है और मांस मछली खा कर दूध पीने से सफेद दाग होना निहायत ही मनगढ़ंत बात है।

सफेद दाग से निजात पाने की बात करते हुए डॉ० अजय कुमार राय ने कहा कि माइकल जैक्सन से लेकर चंद्बाबाबू नायडू, गौतम सिंघानिया तक सफेद दाग से पीड़ित है पर क्या इनके कार्य करने की क्षमता में कोई कमी आई है बल्की ऐसे लोगों ने दुनिया पर फतह हासिल की है। सफेद दाग शरीर से ज्यादा नजरिये की बिमारी बन चुका है जिसके लिए जागरुकता जरूरी है।


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