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भारत में बदलता राजनीतिक माहौल, अस्तित्व की खोज करता विपक्ष

Lucknow /7, | Publish Date: Aug 10 2017 3:07PM IST Views:444

हिमांशु मिश्रा (पत्रिका लाइव ब्यूरो)

लोकतंत्र में जितना महत्व सरकार का है उतना ही विपक्ष का भी है, क्यूंकि अगर विपक्ष मजबूत नहीं होगा तो सरकार के काम को सुचारु रूप से नहीं समझा जा सकेगा और तानाशाही का माहौल बनने का खतरा रहेगा। भारत दुनिया में छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश है। दुनिया के सभी देशों की तरह अपनी संस्कृति और सभ्यता के लिए प्रसिद्ध भारत में भी राजनीति का अपना एक अलग स्थान है। भारत में अचानक से बदलते राजनीतिक समीकरण देश के लिए अच्छे हैं या बुरे ये आने वाला वक़्त ही बताएगा लेकिन वर्तमान हालातों को देखकर यह कहना गलत न होगा कि आने वाले समय में शायद विपक्ष अपने अस्तित्व की खोज में भटकता दिखे।

आंकड़े बयां कर रहे हालात -
वर्तमान के आंकड़े उठा कर देखें तो कुल 13 राज्यों (उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, हरियाणा, राजस्थान, झारखण्ड, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर) में भाजपा की सरकार कार्यरत है, इसके अलावा 5 राज्यों (जम्मू कश्मीर, बिहार, आंध्रप्रदेश, सिक्किम, नागालैंड) में बीजेपी सहयोगी पार्टी के रूप में शासन कर रही है। ये तो हुई केंद्र में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी की बात। अब बात करते हैं विपक्ष की जिसमें सिर्फ कांग्रेस है जोकि कुल 5 राज्यों (पंजाब, हिमाचल प्रदेश, मिज़ोरम, मेघालय, कर्नाटक) में सत्ता संभाल रही है इसके अलावा 5 राज्य (केरल, उड़ीसा, तेलंगाना, त्रिपुरा, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल) ऐसे भी हैं जहाँ स्थानीय दल सरकार चला रहे हैं। इस पूरे आंकड़े में नज़र घुमाने पर पता लगता है कि बीजेपी जिस राजनीतिक शिखर पर खड़ी है वहां उसके आस-पास कोई दूसरा दल मौजूद नहीं है। 

बदलाव का नया तूफान -
अखंड मानवतावाद और आर्थिक उदारीकरण की विचारधारा से प्रेरित भारतीय जनता पार्टी बीते कुछ वर्षो में विकास का जो एजेंडा लेकर चली थी वह काफी हद तक सफल होता दिख रहा है क्यूंकि इससे ना केवल देश में बदलाव का नया तूफान आया बल्कि पूरे विश्व को इस बात की खबर लग गई कि हिंदुस्तान आज भी किसी से पीछे नहीं है। अगर ध्यान से देखें तो बीजेपी आज जिस स्थिति में है वहां तक पार्टी को पहुंचने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सहयोग ज्यादा महत्वपूर्ण रहा, नरेंद्र मोदी के बिना शायद ही कभी बीजेपी इस स्थिति में आ पाती। मोदी के अलावा अगर बात करें तो राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का योगदान भी पार्टी के लिए बहुत महत्वपूर्ण रहा है।

आगामी लोकसभा चुनाव संग्राम - 
2019 के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर देखा जाए तो भारतीय जनता पार्टी 3 साल के कार्यकाल के बाद वर्तमान में बहुत मजबूत स्थिति में नज़र आ रही है। चुनावों के परिणाम क्या होंगे ये अभी से कहना मुश्किल है लेकिन पार्टी के मजबूत बयानों और मौजूदा हालात को देखकर तो यही लग रहा हैं कि 2019 में फिर एक बार बीजेपी का झंडा लहराएगा। इस बात को विपक्ष की कमजोरी समझे या सरकार की मजबूती लेकिन माहौल इतना ख़राब है कि विपक्ष के बड़े-बड़े नेता अपनी पार्टियों से इस्तीफा देकर बीजेपी में लाइन लगाकर शामिल हो रहे हैं और उन पार्टियों के मुखिया इस स्थिति में भी कुछ कर नहीं पा रहे हैं।


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