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इस 'रक्षाबन्धन' बदले अपनी सोच, अपनी ही नहीं बल्कि दूसरों की बहनों की सुरक्षा का भी लें संकल्प

Lucknow /7, | Publish Date: Aug 5 2017 2:17PM IST Views:505

हिमांशु मिश्रा (पत्रिका लाइव ब्यूरो)
रक्षाबन्धन, जोकि प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। रक्षाबन्धन में बहनें अपने भाइयों के हांथों में रक्षासूत्र बांधती हैं और भाई अपनी बहनो की हमेशा रक्षा करने का वचन देते हैं। यह बात तो हम सभी को पता है कि ये त्यौहार भाई और बहन के अटूट रिश्ते और प्रेम का प्रतीक है लेकिन क्या आपको ये बात पता है कि आखिर किस तरह से हम इस रक्षाबंधन के त्यौहार को सफल बना सकते हैं। आइए जानें आखिर क्या है रक्षाबंधन और क्यों है इसकी इतनी महत्ता -   

रक्षाबंधन कब होगा सफल -
हम सभी की बहनें हमें राखी बांधती है और हम उनकी रक्षा का संकल्प लेते है और हर हाल में उसे पूरा भी करते हैं लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि सिर्फ इतना कर देना ही रक्षाबंधन के त्यौहार की सफलता के लिए काफी है? अगर आप सिर्फ अपनी बहन की सुरक्षा के संकल्प को पूरा करके खुश है तो बांकियों का क्या? इस साल क्या आप रक्षाबंधन पर एक अलग सोच के साथ, एक अलग संकल्प लेने की कोशिश कर सकते? अगर हाँ तो इस साल आप सिर्फ अपनी ही नहीं बल्कि दूसरे की बहन की सुरक्षा का भी संकल्प करें। जिससे समाज में हो रहे महिला अत्याचारों को कम किया जा सकेगा। 

अक्सर देखा गया है कि लोग डर या व्यस्तता के के कारण अपने सामने हो रही नाइंसाफी को नजरअंदाज कर देते हैं, अगर आप भी ऐसा करते हैं तो एक बार सोच के देखिये कि अगर वहीँ अत्याचार आपकी बहन के साथ हो रहा हो तब? क्या आप उसे बचने की कोशिश नहीं करते? अगर करते तो दूसरों की मदद करने में क्या हर्ज़ है। 

बदलते समाज के साथ बदले अपनी सोच -
समय है कुछ नया करने का, समय है कुछ नया सोचने का क्यूंकि समय की मांग है कुछ अलग। देश आज इतनी तरक्की कर रहा है, दिन-पर-दिन टेक्नोलॉजी बढ़ रही है, हम सिर्फ धरती पर ही नहीं बल्कि दूसरे ग्रहों पर भी पहुँच गए हैं। जब सब कुछ इतना बदल गया है तो आज भी हमारी सोच इतनी सीमित क्यों? 

एसिड अटैक, बलात्कार जैसी घटनाएँ आजकल आम हो गई है, ऐसी घिनौनी हरकत करने वालों से आज मेरा सिर्फ एक सवाल है कि क्या वो लोग अपनी बहन/बहू/बेटी को उस असीम पीड़ा के हाल में देख सकते हैं जिसमें वो दूसरों को किसी न किसी वजह से या कभी कभी बेवजह ही धकेल देते हैं। क्या वो किसी की बहन नहीं है? क्या वो एक इंसान नहीं है? क्या आपके अंदर की इंसानियत मर चुकी है? मै सिर्फ इतना कहना चाहूँगा कि इस साल अपनी सोंच को भी रक्षाबंधन के पवित्र त्यौहार पर बदल डालो ताकि अगली बार एक गर्व और विश्वास के साथ आप इस त्यौहार को मना सके।


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