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व्हिस्की के मंहगे ब्राण्ड से ज्यादा मशहूर है ये कलाकार, बस कंडक्टर से बने थे एक्टर

Lucknow /10, | Publish Date: Jul 29 2017 3:35PM IST Views:411

लखनऊ। चम्पी ! तेल मालिश ! सर जो तेरा चकराए या दिल डूबा जाए, आजा प्यारे पास हमारे काहे घबराए। इस लोकप्रिय फिल्मी लाइनों को सुनते ही दिलो-दिमाग में 60-70 के दशकों के मशहूर अभिनेता जानी वाकर का हंसता मुस्कराता चेहरा उभर आता है।

15 मई, 1923, को इन्दौर में जन्में जानी वाकर का निधन आज ही के दिन 29 जुलाई, 2003, मुम्बई में हो गया था। इनका असली नाम बदरुद्दीन जमालुद्दीन क़ाज़ी था। अपना नाम उन्होंने विस्की के एक लोकप्रिय ब्रैंड के नाम पर रखा था। किसी हीरो से भी ज्यादा मेहनताना लेने वाले जानी वाकर खुद शराब नहीं पीते थे, हालांकि उनको शिकार खेलने की लत जरुर थी। बाद में यह तय करना मुश्किल हो गया था कि दोनों में ज़्यादा लोकप्रिय कौन है।

जानी वाकर ने ज़िन्दगी की शुरुआत बस कंडक्टर के रूप में की थी। बस में यात्रियों से मज़ाकिया बातें करना उनकी आदत में शुमार था, जिससे बलराज साहनी आकर्षित हो गए और उन्होंने जानी वाकर को गुरु दत्त से मिलवाया था।

जॉनी वॉकर की शादी नूरजहाँ से हुई थी। इन दोनों की मुलाक़ात 1955 में गुरुदत्त की फ़िल्म 'मिस्टर एंड मिसेज़ 55' के सेट पर हुई थी। जॉनी वॉकर और नूर के तीन बेटियाँ है: कौसर, तसनीम, फ़िरदौस और तीन बेटे है: नाज़िम, काज़िम और नासिर।

जानी वाकर बाज़ी, आर-पार, मिस्टर एंड मिसेज 55, सीआईडी, काग़ज़ के फूल, प्यासा जैसी गुरु दत्त की फ़िल्मों की एक पहचान बने और चोरी-चोरी, नया दौर, मधुमती, मेरे महबूब, आनंद आदि गंभीर फ़िल्मों में जॉनी वॉकर हास्य का तड़का लगाने आते थे।


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