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विश्व फोटोग्राफी दिवस, 19 अगस्त सन् 1939 से मना रहे हैं ये दिन

Lucknow /7, | Publish Date: Aug 19 2017 12:42PM IST Views:574

लखनऊ। शायद दुनिया में कैमरा न होता तो जिंदगी बेरंग हो जाती है और हम अपने जीवन के महत्वपूर्ण पलों को कभी दुहरा नहीं पाते। कैमरे की दुनिया ने श्वेत श्याम युग से लेकर त्रिआयामी फलक तक का रास्ता तय किया है।
पर क्या आपने कभी सोचा कि दुनिया का सबसे बड़े मैगा पिक्सल का कैमरा तो ऊपरवाले ने हम सब की आंखों में पहले से ही फिट करके भेजा है। संसार में प्रकृति ने प्रत्येक प्राणी को जन्म के साथ एक कैमरा दिया है, जिससे वह संसार की प्रत्येक वस्तु की छवि अपने दिमाग में अंकित करता है। वह कैमरा है उसकी आँख। इस दृष्टि से देखा जाए तो प्रत्येक प्राणी एक फ़ोटोग्राफ़र है। फोटोग्राफी के शताब्दी भर लम्बे सफ़र ने अनेकों पड़ाव पार किए हैं और आज कैमरे की गुणवत्ता को आम भाषा में मैगा पिक्सल से मापा जाता है पर ध्यान रखिए दोस्तों दुनिया चाहे कितने ही मैगा पिक्सल का कैमरा बना ले, हजारों किलोमीटर दूर चांद तारों की फोटो खींच ले पर जो कैमरा प्रकृति ने हमें बक्शा है उसकी तुलना कोई नहीं कर सकता है। तो हुआ न आपके पास दुनिया का सबसे बड़े मैगा पिक्सल का कैमरा।

सन् 1939 से दुनिया में हर 19 अगस्त को विश्व फोटोग्राफी दिवस मनाया जाता है और इसका उद्देश्य मानवता और संस्कृति से सीधा जुड़ा हुआ है। आज लगभग हर व्यक्ति के मोबाइल फोन में कैमरा होता है जिसमें वह जीवन के खास पलों को कैद करना नहीं भूलता है। आज फोटोग्राफी एक बड़े व्यवसाय का रूप धारण कर चुकी हैं और विज्ञान ने इस विधा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है। असल चित्र तकनीकी रूप में कितना ही अच्छा क्यों न हो, वह तब तक सर्वमान्य नहीं हो सकता, जब तक उसमें विचार नहीं हो। एक अच्छी पेंटिंग या अच्छा चित्र वही है, जो मानवीय संवेदना को झकझोर दे। कहा भी जाता है कि एक चित्र हजार शब्दों के बराबर है।

सबसे पहले सन् 1839 में फ़्राँस के वैज्ञानिक लुईस जेकस तथा मेंडे डाग्युरे ने फ़ोटो तत्व को खोजने का दावा किया था। ब्रिटिश वैज्ञानिक विलियम हेनरी फॉक्सटेल बोट ने नेगेटिव-पॉजीटिव प्रोसेस ढूँढ लिया था। सन 1834 में टेल बॉट ने लाइट सेंसेटिव काग़ज़ का आविष्कार किया, जिससे खींचे चित्र को स्थायी रूप में रखने की सुविधा प्राप्त हुई। फ़्राँसीसी वैज्ञानिक आर्गो ने 7 जनवरी, 1839 को फ्रेंच अकादमी ऑफ़ साइंस के लिए एक रिपोर्ट तैयार की। फ़्राँस सरकार ने यह प्रोसेस रिपोर्ट ख़रीदकर उसे आम लोगों के लिए 19 अगस्त, 1939 को मुफ़्त घोषित किया। यही कारण है कि 19 अगस्त को विश्व फ़ोटोग्राफ़ी दिवस मनाया जाता है।

सोशल मीडिया ने आज सभी को फोटोग्राफर बना दिया था परंतु थोड़ा सा ध्यान दे तो साफ दिखाई देता है कि ये चाहत तो हमें ऊपरवालें ने लेकर पैदा किया है। सोचिए यदि कैमरा हमारी जिंदगी में न होता तो तब हम हमारे आंखों के लैंस में दुनिया को बसा लेने की कोई कसर बाकी न रखते। अलबत्ता ! फ़ोटोग्राफ़ी का आविष्कार जहाँ संसार को एक-दूसरे के क़रीब लाया, वहीं एक-दूसरे को जानने, उनकी संस्कृति को समझने तथा इतिहास को समृद्ध बनाने में भी उसने बहुत बड़ी मदद की है।

विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर दुनिया भर में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और फोटोग्राफरों को सम्मानित किया जाता है। फ्रेम में बाँधना, प्रकाश व छाया, कैमरे की स्थिति, ठीक एक्सपोजर तथा उचित विषय का चुनाव ही एक अच्छे फ़ोटो को प्राप्त करने की पहली शर्त होती है। यही कारण है कि आज सभी के घरों में एक कैमरा होने के बाद भी अच्छे फ़ोटोग्राफ़र गिनती के ही हैं


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